अचल प्रभाला: टेक्नोक्रैसी से महामारी को ख़त्म नहीं किया जा सकता

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इस सुधार के लिए कोरोनोवायरस महामारी का सहारा लेना पड़ा: एक विशाल वैश्विक महामारी के लिए एक विशाल और सक्षम प्रतिक्रिया की आवश्यकता है।

दुर्भाग्य से, पिछले कुछ महीनों में हुए शोर के बावजूद ठीक यही चीज हमारे पास नहीं है। देश एक साथ काम नहीं कर रहे हैं; तत्काल समस्याएं जैसे परीक्षण किट, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पी पी ई किट)और दवाओं तक पहुंच के तत्काल समाधान मौजूद होने पर भी इनके निसपादन में लंबा समय लग रहा है; कोरोनोवायरस के टीके को निगमों और संस्थानों के भरोसे छोड़ दिया जा रहा है, जिनके दिल में हमारे सर्वोत्तम हित नहीं हैं; जबकि वह प्रणाली जिसने इस भारी तबाही को जन्म दिया है, उसे अछूता छोड़ दिया जा रहा है, जैसे कि यह कोई समस्या के बजाय समाधान है। अब वक्त है की यह लड़ाई सेमिनार रूम और कोर्ट चैंबर्स से से बाहर, सड़कों पर आए ताकी हम दुनिया में अपनी इच्छा के अनुसार वह मिले जिसके हम हकदार हैं: वह दवाएं और टीके जो हमारे जीवन के लिए आवश्यक हैं ।

कोविड -19 के उपचार तक पहुंच: जबकि दुनिया टीकों की प्रतीक्षा कर रही है, कई मौजूदा दवाओं, स्टेरॉयड से लेकर एंटीवायरल तक ने कोरोना वायरस से हुए नुकसान की भरपाई करने में विभिन्न स्तर की सफलता दिखाई है। इन दवाओं के उपयोग के साथ तीन समस्याएं हैं। एक: मूल्यांकन के लिए दवाओं को जिस प्रक्रिया द्वारा चुना जाता है, वह अपारदर्शी है और उद्योग की अगुवाई वाली होती है, जिसके परिणामस्वरूप कभी-कभी पुराने, सस्ते उपचारों के बजाए अधिक महंगी चिकित्सा पद्धति का परीक्षण किया जाता है। दूसरा यह की नए उपचारों के लिए, बौद्धिक संपदा एकाधिकार (इंटेलेकचुअल प्रॉपर्टी मोनोपॉली) नाटकीय रूप से कीमत और उपलब्धता दोनों के मामले में दवा तक पहुंच को बाधित करता है, जैसा कि वर्तमान में रेमडेसिवीर के साथ स्थिति दिखाती है। तीसरा यह की ​​परीक्षणों में उपयोग किए जाने वाले सरकारी धन, जैसे कि रेमेडिसविर के मामले में, सरकार या सार्वजनिक पहुंच के संदर्भ में नहीं हैं, जबकि परीक्षणों में उत्पादित डेटा को गुप्त रखा जाता है जो अनावश्यक रूप से जनता की समझने और मूल्यांकन करने की क्षमता को बाधित करता है ।

वैक्सीन बौद्धिक संपदा प्रणाली (इनलेक्चूअल प्रॉपर्टी सिस्टम) को खारिज करना: अगले कुछ वर्षों में, बाजार में प्रवेश करते ही, कोरोना वायरस के टीके किसे मिलेंगे? यह एक तत्काल चिंता का विषय है, देशों के भीतर (अमीरों को गरीबों पर एक फायदा होगा, आवश्यकता की परवाह किए बिना) और देशों के बीच (अमीर देश गरीब देशों के लिए कम हिस्सा छोड़कर, बाजार पर दबदबा कायम कार लेंगे, किसी भी राष्ट्रीय आवश्यकता की परवाह किए बिना)। टीकों तक उचित, न्यायसंगत और व्यापक पहुंच को सक्षम करने के लिए तुरंत कुछ चीजें करने की आवश्यकता होगी, जिनमें से पहला है बौद्धिक संपदा एकाधिकार को खारिज करना, प्रौद्योगिकी और जैविक सामग्री पर सहयोग के एक करीबी स्तर को अनिवार्य करना, और एक महामारी विज्ञान द्वारा बाध्य, वैश्विक वैक्सीन आवंटन मॉडल संचालित करना । पहला: अमीर सरकारों के पास वैक्सीन की खोज के प्रयास में फेंके जा रहे धन का बड़ा हिस्सा है, उदाहरण के लिए, यह तथ्य कि अमेरिकी सरकार ने मॉडर्ना के वैक्सीन प्रयास को पूरी तरह से वित्त पोषित किया है। दूसरा : CEPI, Gavi, और WHO जैसे प्रभावशाली वैश्विक संगठन वास्तव में अपने प्रभाव और शक्ति का उपयोग कर के न केवल पेटेंट एकाधिकार को निलंबित कर सकते हैं, बल्कि सहयोग को अनिवार्य कार सकते हैं ताकि नए वैक्सीन निर्माता मैदान में प्रवेश कर सकें और आपूर्ति बढ़ा सकें। तीसरा: एक वैश्विक वैक्सीन आवंटन मॉडल को लागू करने के साथ-साथ C-TAP, कोविड -19 प्रौद्योगिकी एक्सेस पूल को वास्तव में कार्य करने के संदर्भ में, WHO ने निर्णायक रूप से कार्य कर सकता है।

फार्मास्यूटिकल्स के उत्पादन के लिए एक नई प्रणाली: कोरोनो वायरस के तूफान में इस प्राथमिकता पर ध्यान देना कठिन है कि दवाओं और टीकों के उत्पादन की वर्तमान प्रणाली निरंतर अक्षम और अन्यायपूर्ण है। हमारे पास व्यवहार्य विकल्प हैं, उदाहरण के लिए, मौजूदा कोरोनो वायरस के डब्ल्यूएचओ फ्लू नेटवर्क का उत्पादन जो कि हम में से हर साल करोड़ों लेते हैं। ये टीके एक अंतर-सरकारी, अंतर-संस्थागत, वैश्विक सहकारी दृष्टिकोण द्वारा उत्पादित होते हैं, जिसमें 110 देशों की 140 राष्ट्रीय प्रयोगशालाएं शामिल हैं - और प्रभावी, सस्ती, टीकों के परिणामस्वरूप पूरे ग्रह के लिए एक सस्ती कीमत पर बड़े पैमाने पर उत्पादित किए जा सकते हैं। एक नई प्रणाली बनाने के लिए, हमें यह पहचानना होगा कि हमारे बीच ऐसी हीं एक प्रणाली पहले से प्रभाव में हैं, और इस बात पर पुनर्विचार करने के लिए कि कौन सी दवाएं और विशेष रूप से टीके प्रतिनिधित्व करते हैं - एक वैश्विक सार्वजनिक अच्छाई का जो राज्यों के आवश्यक कर्तव्य का हिस्सा है, बजाय नवउदारवादी बाजार प्रणालियों के क्रूर तर्क से सहमत होने के ।

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Available in
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Authors
Achal Prabhala
Translators
Jahnavi Taak and Surya Kant Singh
Published
20.10.2020
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