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थाईलैंड विद्रोह: "देश के सही मालिकों के लिए"

पिछले महीनों से एक व्यापक राजनीतिक आंदोलन जो की मुख्य रूप से थाई युवाओं के नेतृत्व में है, थाई सैन्य सरकार के खिलाफ उत्तेजक विरोध को उन्नत कर रहा हैं।
“हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक अंधेरी ताकतों को निष्कासित नहीं किया जाता।” जो भी मौजूदा विरोध का अनुभव कर रहा है, उसने यह वाक्य सुना ही होगा। और यह एक अतिशयोक्ति भी नहीं है, जब थाई जनता ने देखा हैं कि माध्यमिक स्कूल और विश्वविद्यालय के छात्रों के युवा आंदोलन अब पैमाने में विकसित हो चुके हैं और उनका संदेश अब परिपक्व हो चुका है - जिसने देश की राजनीतिक प्रणाली को एक सदमा सा पहुंचाया है।
“हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक अंधेरी ताकतों को निष्कासित नहीं किया जाता।” जो भी मौजूदा विरोध का अनुभव कर रहा है, उसने यह वाक्य सुना ही होगा। और यह एक अतिशयोक्ति भी नहीं है, जब थाई जनता ने देखा हैं कि माध्यमिक स्कूल और विश्वविद्यालय के छात्रों के युवा आंदोलन अब पैमाने में विकसित हो चुके हैं और उनका संदेश अब परिपक्व हो चुका है - जिसने देश की राजनीतिक प्रणाली को एक सदमा सा पहुंचाया है।

कमजोर सैन्य निरंकुशों, कुलीन वर्गों, और राजतंत्रवादियों का समूह जो देश में सत्ता से चिपका हुआ है, उस पर निशाना साधते हुए इन असंतुष्टों ने इस तीव्रता से माँगे की हैं कि जिस तीव्रता तक 2010 के लोकतंत्र-समर्थक प्रदर्शनकारी कभी नहीं पहुँच पाए थे। थाई में यह कहा जा रहा है कि वे मौजूद मिसाल को ध्वस्त कर रहे हैं," साथ हीं "तुम-जानते-हो-कौन और तुम–जानते-हो-क्या” जैसे मुद्दों (विशेष रूप से राजा से संबंधित) का बिना हिचक सामना कर हैं। यह नया और जारी आंदोलन पहले से हीं एक शक्तिशाली खतरा साबित हो चुका है - न केवल सत्तारूढ़ सैन्य सरकार के लिए, बल्कि गहरी-जड़ों वाली कुलीनतंत्र के लिए भी, जो की ना सिर्फ थाई समाज की रोजमर्रा ज़िंदगी में बैठी हुई राजशाही की पूर्ण पवित्रता बल्कि सामंतवादी मानसिकता पर भी निर्भर करता है।

यह आंदोलन निडर और शक्तिशाली है। क्या अधिकारी बिल्कुल भी कांप नहीं रहे हैं? बेशक वे कांप रहे हैं। संबंधित लोगों पर उत्पीड़न और धमकियों की खबरें लगातारआ रही हैं। 26 अगस्त की दोपहर में, दो छात्र कार्यकर्ताओं – टट्टेप रूआँगप्रपेकितसेरी और पनुमास सिंगप्रोम - को गिरफ्तार किया गया। असंतुष्टों पर कई उत्पीड़न के मामले और उनका गायब होना थाईलैंड में शक्तिशाली लोगों के लिए दण्ड-मुक्ति की संस्कृति के विपरीत है -रेड बुलकांड इस तथ्य का सबसे दर्शनीय मामला बन गया और विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रतीकात्मक उपहास का विषय भी। एक दीर्घ संलक्षण टूट गया है और इसने एक नए क्षितिज का द्वार खोल दिया है, सवाल यह है कि "वहाँ पहुंचने में कितना समय लगता है?"

“इस देश में, जहां तानाशाह लोगों को रौंद देते हैं, हम और अधिक समय तक उत्पीड़न क्यों सहें?”

18 जुलाई, 2020 को बैंकाक मेंडैमोक्रेसी मोनुमेन्टके बगल में एक अस्थायी मंच पर खड़े एक युवक द्वारा कविता की एक पंक्ति को ज़ोर से पढ़ा गया। दर्दभरी पुरानी समस्याओ को शब्दों में प्रस्तुत करके उसकी वाणी ने गर्म हवा में छेद कर दिया। फिर भी यह सभा निर्विवाद रूप से नई थी - अधिक साहसिक, जवान, और एक सौंदर्य भाषा के माध्यम से व्यक्त की गई थी, ऐसी भाषा जो जितनी लोकप्रिय संस्कृतियों से खींची गई थी उतनी हीं राजनीतिक इतिहास से भी। इस ताजा रूप से गठितफ्री यूथ(आजाद जवान/เยาวชนปลดแอก) समूह को पूरे देश में अनुगामी विद्रोह के मील के पत्थर के रूप में माना जाना चाहिए। ये विद्रोह दस साल पहले हुए इस देश के एक बड़े विरोध प्रदर्शन के मुकाबले में बिल्कुल अलग सुनाई पड़ता है।

प्रदर्शनकारियों की युवा पीढ़ी, जिसमें कई हाई स्कूल और विश्वविद्यालय के छात्र शामिल हैं, ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें लगता है कि रोजमर्रा ज़िंदगी में होने वाले उत्पीड़न का उन्हे सामना करना चाहिए।उन्होंने विशेष रूप से शैक्षिक प्रणाली में निरंकुशतावाद पर स्पष्ट रूप से सवाल उठाए हैं। वे अखंड व्यवहार के मानदंड, दम घोंटने वाली वरिष्ठता, यौनवाद, और कक्षा में दिखाई देने वाले अन्तर्विरोधी उत्पीड़न का विरोध करते है। युवा लोगों से थाइलैंड में जो अपेक्षा की जाती है और अक्सर जैसा व्यवहार करने के लिए मजबूर किया जाता है, उसके पूर्ण प्रतिरोध में वे उन रेखाओं को धुंधला कर रहे हैं जो कभी ज्वलंत थीं, जो युवाओं पर बड़ों की शक्ति को नियंत्रित करती हैं, उन्हे #मुझेपड़ाने कीहिम्मतकरनेकेलिएशुक्रिया (#ขอบคุณนะคะที่กล้าจะสอนหนู) (#thankyoufordaringtoteachme) जैसेहैशटैगबना कर मिटा रहे हैं। इनका संघर्ष शैक्षिक स्थानों से तेजी से आगे बढ़ रहा है, और इस आंदोलन ने जो करना शुरू कर दिया है, उसमें भारी विनाशक क्षमता है। समालोचना के इस सैलाब के जवाब में, सत्तारूढ़ सैन्य जनता अब युवा कार्यकर्ताओं और अन्य लोकतंत्र-समर्थको पर "देश से घृणा करने वाले गुट" (พวกชังชาติ) होने का आरोप लगा रही है।

कार्यकर्ता-कवि मूल थाई में गाना जारी रखता है:

"इस देश का मतलब है हर कोई, ना कि सिर्फ कुलीन वर्गों का एक समूह,

इस देश को असंतुष्टों को चुप नहीं कराना चाहिए,

इस देश को अपने लोगों की सुननी चाहिए, जो अपना जीवन खुद परिभाषित करते हैं,

और इस देश को प्रगति करनी चाहिए, न कि कुलीन पुरुषों के तले पतन।“

"इसे जंगल की आग की तरह फैलने दें" (ขอให้มันเป็นไฟลามทุ่ง), एक और वक्ता ने सुझाव दिया। और यह फैला भी। बेंगकोक में 18 जुलाई के विरोध के एक दिन बादचिआंगमईमें एक और सभा हुई, और फिर अगस्त के दौरान महासरखम,चोनबुरी,फ्रे,अयुथ्थाया,पथुमथनी,खॉन केन,लैम्पून,उदोनथानी,पट्टालुंग,नकॉर्नश्रीथममरत,समुतप्रकर्ण,चन्थबुरी,नखोन सावन,सुफन बुरी,रोई एट, और अन्य जगहों पर भी सभाए आयोजन की गई। इन सभाओं के मध्य में प्रदर्शनकारीलाइव पोस्ट,ट्वीट,शेयरऔर प्रसारण भी करते हैं।

उनका असंतोष बहुपक्षीय, क्षैतिज और कई-आवाज़ वाला है। आजकल, थाईलैंड में 2010-11 के लोकतंत्र-समर्थकरेड शर्ट मूवमेंटकी धीमी गूँज है जो कि यहाँ का अंतिम जन आंदोलन था। लेकिन मौजूदा आंदोलन उस दस साल पुराने आंदोलन से कहीं ज्यादा अकल्पनीय क्षितिज की ओर बड़ चुका है। 7 अगस्त को,फ्री यूथने अपने दायरे को व्यापक करने के लिए अपना नाम बदलकरफ्री पीपल(आजाद लोग) कर दिया। इस घोषणा के कुछ घंटों बाद ही ३१ विरोधी नेताओं के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए, और संघर्ष फिर से तेज़ हो गया।

महामारी से ठीकपहले, थाईलैंड की संवैधानिक अदालत ने उदारफ्यूचर फॉरवर्ड पार्टी(FFP) को भंग कर दिया और उसके अधिकारियों को राजनीति से दस साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया। नतीजतन, हालिया हुए चुनाव में, कई पहली बार के मतदाताओं ने अपने वोटों को सचमुच के कूड़ेदान में जाते देखा। यह इस ही मुद्दे पर था कि युवा लोगों ने शुरू में पूरे देश में, सीमित तरीकों से विरोध करना शुरू किया था। लेकिन उनका शुरुआती असंतोष अब अनुपात और दृश्यता में बड़ गया है। महामारी और तालाबंदी ने लगभग 2020 की शुरुआत से विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा आयोजितफ्लैश मॉब्सको लगभग ग़ायब हीं कर दिया था लेकिनमॉब्सने अपनी प्रतिरोध क्षमता को साबित कर दिया है।

देश तब उपद्रव में डूब गया जब सरकार अधिकांश लोगों, जो की महामारी-तालाबंदी से गंभीर रूप से पीड़ित थे, की मदद करने में विफल रही। इससे सरकार की अक्षमता, और उससे भी बदतर, संकट प्रबंधन के प्रति उनके आधिकारिक रवैये का पता चलता है। उदाहरण के लिए, भूख और बेरोज़गारी को सतह पर उभरता देख नागरिकों और वीआईपी लोगों के बीच बर्ताव के दोहरे मापदंड काफी स्पष्ट हैं। सरकार कोरोनावायरस को अपने खतरनाक आपातकाल कानून का विस्तार करने हेतु एक बहाने के रूप में इस्तेमाल कर रही है। यह कानून केवल अपने नागरिकों को नियंत्रित करने का एक साधन है, वायरस को नहीं। और सरकार के द्वारा वायरस के प्रति ऐसी शिथिलता और अधिनायकवाद ने आंदोलन को और दबा दिया है।

हाल ही में महासरखम विश्वविद्यालय में #อีสานสิบ่ทน (“ईसान (पूर्वोत्तर थाईलैंड) इसे नहीं लेगा”) के बैनर तले आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान, एक हाई स्कूल की छात्रा ने भूख और बेरोज़गारी के बारे में बात की। उसने तर्क दिया कि सामाजिक कल्याण एक अधिकार है - "यह दया या किसी के प्रति उपकार के बारे में नहीं है।" अपने भाषण में, युवा छात्रा ने स्थायी समस्याओं, विशेष रूप से सामंतवाद और संरक्षण की प्रणालियों को संबोधित किया, जो लोगों को ऋणी महसूस कराते हैं केवल उस सहायता को प्राप्त करने के लिए, जिसके लिए वे मनुष्य के रूप में हक़दार हैं।

परिणाम गहरे आए हैं। थाई राजशाही को समाप्त करने या वर्तमान राजा की आलोचना करने वाले नारे अब आम बात हो गए हैं। उदाहरण के लिए,नखोन श्री थम्मरतमेंवलाईलकविश्वविद्यालय में, एक बैनर कह रहा था, "हमें कोई सुधार नहीं, केवल क्रांति चाहिए।" एक और बैनर कह रहा था, "हम ओ (O) नहीं हैं" - एक स्वभावतया शरारती यमक, जिसका मतलब हैं की "हम OK (ओके) नहीं हैं," लेकिन K को हठाते हुए, एक दोहरे-मतलब में, यह भी कह रहा है कि "हम राजा के साथ नहीं हैं।" यह आश्चर्य की बात नहीं है कि बैनर अगली ही सुबह रहस्यमय तरीके से गायब हो गया - राजा का अपमान करना देश के सबसे गंभीर अपराधों में से एक है।

24 जुलाई को, सेना प्रमुख जनरल, अपिरत कॉंगसॉम्पोंग, ने राजा और उनके विषयों के बारे में एक अंधराष्ट्रीय कहानी सुनाई, जिससे एक अत्यधिक-भावुक और रोने वाला तमाशा बन गया। लेकिन युवा पीढ़ी राजनीतिक अशांति के बीच में पली बढ़ी है, और उन्होंने अपना जीवन स्कूलों में सैन्य प्रचार के अधीन बिताया है। दो टूक कहा जाए तो वे सस्ती भावुकता को स्वीकार नहीं करेंगे, जब उनकी सरकार नागरिकों के प्रति कई प्रकार की हिंसा और लोकतांत्रिक विरोधी व्यवहार को जारी रखे हुए हैं।

वास्तव में, यह अपरिवर्तनीय फ्रैक्चर न केवल राजनीतिक है, बल्कि सांस्कृतिक भी है। 18 जुलाई के विरोध के बाद, कुछ सरकार समर्थक लोगों ने युवा आंदोलन को “नकली भावुकता झलकाने वाला” कहते हुए आलोचना की। इस तरह की निराशाजनक टिप्पणी ने एक रचनात्मक विरोध को जन्म दिया जो खुद को "#नकली भावुकता वाले नहीं बल्कि स्त्रीवत लोग, मेरी प्यारी सरकार” (#ม๊อบไม่มุ้งมิ๊งแต่ตุ้งติ้งนะคะคุณรัฐบาล ) कहता था। बैंकॉक के पुराने शहर में लोकतंत्र स्मारक के चारों ओर घूमते हुए, उन्होंने विवाह समानता,एलजीबीटीक्यूअधिकारों के लिए आह्वान किया और आखिरकार, इंद्रधनुष का झंडा बुलंद किया।

युवा प्रदर्शनकारियों का यह एक दिलचस्प कदम है कि वे अपनी रोज़मर्रा की संस्कृति को राजनीतिक क्षेत्र में ले आए हैं। क्या हम यह कहें कि ये 1960-70 के दशक की वामपंथी भाषा को भी पीछे छोड़ दे रहे हैं? तो फिर, आप "हमतारो" विषयगत गीत को क्या कहेंगे? एक और दिन, प्रदर्शनकारियों ने जापानी कार्टून से एक हम्सटर को मार्च करने और एक गाना गाने के लिए आमंत्रित किया - "सबसे स्वादिष्ट भोजन करदाताओं का पैसा है", और वे स्वयं चिल्लाए, "संसद भंग करो! संसद भंग करो! संसद भंग करो!” कई और विषयगत विरोध प्रदर्शन अभी होने हैं। जल्द ही हम "हैरी पॉटर" विरोध देखेंगे, जो अपने परिचित वाक्यांश, "आप जानते हैं कौन" (#คนที่คุณก็รู้ว่าใคร) के साथ, थाईलैंड के राजनीतिक माहौल के साथ पूरी तरह से ठीक बैठता है।

10 अगस्त को, स्वयं को “थम्मासत और राजनैतिक सभा” (“थम्मासत एंड राजनैतिक विज्ञान” पर एक यमक) कहने वाले समूह के एक सदस्य, पानुसाया सिथिजीरावट्टानकुल, ने थम्मासत विश्वविद्यालय, रंगसिट परिसर, में विधानसभा के दौरान एक शानदार भाषण दिया। उन्होंने "राजशाही के साथ समस्याओं को हल करने के लिए 10 मांगों" का प्रस्ताव रखा, जिससे एक और जागरूकता आई कि सार्वजनिक भाषण की पिछली सीमा अब लांग ली गई है। उन्होंने मांग की कि अब सब कुछ सार्वजनिक रूप से कहा जाना चाहिए और "सामंतवाद की मौत, जनता अमर रहें” (ศักดินาจงพินาศ ประชาราษฎร์จงเจริญ) वाक्यांश के साथ मंच को बंद किया ।

कुछ दिनों बाद, चुलालॉंगकॉर्न में एक सभा विशेषाधिकार प्राप्त लोगों की आलोचना करने के लिए एक मंच बन गई, जिसमें केंद्रीय बैंकॉक के सबसे पुराने विश्वविद्यालय चुलालॉंगकॉर्न विश्वविद्यालय जैसे राष्ट्र के तथाकथित स्तम्भ शामिल हैं। यह कार्यक्रम अच्छी तरह से योजनाबद्ध था, क्योंकि प्रतिनिधि छात्रों ने राजनीतिक आंदोलनों और राजनीतिक असंतुष्टों के इतिहास को फिर से दोहराया, और एक दशक पुराने "रेड शर्ट आंदोलन" को भी याद किया।

ये छिटपुट विधानसभाएं युवा आंदोलन को मजबूत करती हैं और जनता को संदेश देती हैं कि वे वास्तव में एक बेहतर राजनीति की उम्मीद कर सकती है। 16 अगस्त को लंबे समय से प्रतीक्षित और सबसे बड़े विरोध के माध्यम से, सार्वजनिक असंतोष ने रचादमनोयन रोड पर खुद को प्रकट किया। युवाओं ने माहौल को संभाला जबकि प्रदर्शनकारियों के विभिन्न समूह इस सभा में शामिल हुए, जिनमें रेड शर्ट समर्थक भी शामिल थे, जिनका सपना अब यह युवा आंदोलन आगे ले जा रहा है। यह सभा सांस्कृतिक विरोध के कई रूपों का मिश्रण थी - पारंपरिक विरोध, स्ट्रीट थिएटर, कॉमेडी, संगीत कार्यक्रम। यह इसकी विशालता का ही प्रमाण था कि कोई भी एक बार में इसकी पूरी छवि को पकड़ने में सक्षम नहीं हुआ।

जैसा कि प्रतीकों की फिर से व्याख्या की गई और उन्हे पुन: प्रस्तुत किया गया, उनमें से एक “सफेद बो टाई” है जो कई लड़कियों के स्कूलों में महिला छात्रों के लिए पहनना आवश्यक है। "स्कूल पहला तानाशाह है," युवा आंदोलन ने स्पष्ट रूप से कहा है। 19 अगस्त को, प्रदर्शनकारियों ने साथी छात्रों को कक्षा के बाद "शिक्षा मंत्रालय" पर जाने का आह्वान किया, प्रदर्शनकारियों ने एक बार के-आज्ञाकारी प्रतीक (सफेद गाँठ) को दर्शाया। इसके फलस्वरूप, यह थाई स्कूलों में सत्तावाद के खिलाफ विद्रोह और थाई शिक्षा में अन्य गहरी समस्याओं को दर्शाने का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया है।

लड़ने की इच्छाशक्ति से ज्यादा मजबूत लड़ाई को खत्म करने की इच्छाशक्ति है। युवा थाई निवासी एक स्थायी परिवर्तन की उम्मीद कर रहे हैं ताकि, अत्याचार, जैसा कि हाल ही में एक हैशटैग में कहा गया है, "यह हमारी पीढ़ी में समाप्त हो जाएगा" (#ให้มันจบที่รุ่นเรา)। यह चल रहा विद्रोह एक लंबी लड़ाई हो सकती है, और इसे जीतने में एक पीढ़ी से अधिक समय लग सकता है। लेकिन, हर तरह से, थाई लोगों के लिए यह एक सार्थक सपना है। जैसा कि एक विरोध बैनर पर लिखा गया है, यह "मुकुट को टुकड़ों में कुचलने और फिर उसके टुकड़ों को देश के असली मालिकों को वितरित करने” का एक सपना है।

थाईलैंड में जो कुछ हो रहा है वह न केवल एक स्थानीय उथल-पुथल के रूप में देखा जा सकता है, बल्कि इस महामारी-युग की वैश्विक राजनीतिक-अशांति के संकेत के रूप में भी देखा जा सकता है। अभी भी विरोधों के संबंध में बहुत कुछ तय किया जाना है। फिर, यह शायद एक नई और लंबी लड़ाई की शुरुआत भी हो सकती है। और किसे पता कि सितंबर में होने वाली विधानसभा, अंत मे, एक सबसे ठंडी सर्दियों की शुरुआत कर दे?

तस्वीर का श्रेय: फ्री यूथ

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Available in
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Authors
Judha Su and Benjamin Tausig
Translators
Surya Kant Singh and Mohit Sachdeva
Date
17.09.2020

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