Economy

अमेजन कर्मचारियों द्वारा सार्वजनिक शौच के लिये बेज़ो ज़िम्मेदार है।

अमेज़न डिलीवरी कर्मचारियों को सार्वजनिक रूप से 'हल्के होने' के लिये शर्मिंदाकिया जा रहा है। मगर ये अमेज़न द्वारा थोपी गयी कार्यदशायें हैं जो इसके लिये वास्तव में ज़िम्मेदार हैं।
सार्वजनिक शौच की हाल ही में आइ रिपोर्टों की प्रतिक्रिया में अमेज़न डिलीवरी कर्मचारियों को खुले में 'हल्के होने' के लिये लताड़ा जा रहा है। शौचालय उपयोग तक की अनुमति दिये बग़ैर, जानलेवा भागम भाग और काम के लिये लगातार निगरानी में रख कर मजबूर करते हुए उन्हें उनके श्रमिक और मानवीय अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। मानो यही काफ़ी नहीं था,डिलीवरी सेवाओं को ‘आउटसोर्स’ कर के अमेज़न अपनी ज़िम्मेदारी से मुकर रहा है।
सार्वजनिक शौच की हाल ही में आइ रिपोर्टों की प्रतिक्रिया में अमेज़न डिलीवरी कर्मचारियों को खुले में 'हल्के होने' के लिये लताड़ा जा रहा है। शौचालय उपयोग तक की अनुमति दिये बग़ैर, जानलेवा भागम भाग और काम के लिये लगातार निगरानी में रख कर मजबूर करते हुए उन्हें उनके श्रमिक और मानवीय अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। मानो यही काफ़ी नहीं था,डिलीवरी सेवाओं को ‘आउटसोर्स’ कर के अमेज़न अपनी ज़िम्मेदारी से मुकर रहा है।

"मैंने अपने जीवन में बहुत से अलग-अलग जॉब किये हैं," कार्ल, अमेज़न के एक डिलीवरी ड्राइवर ने बताया, " और विश्वास कीजिये, यह सबसे ख़राब जॉब है ".

कार्ल यूके के उन असंख्य कूरियरों में से एक है जो पेंडमिक महामारी के चलते बढ़ती मांग के कारण " भयावह त्रासद" कार्यदशाओं में काम करने के लिये मजबूर किये गये। बिना किसी विश्राम अवकाश के लगातार हाड़तोड़ काम, लगातार निगरानी, और शौचालय सुविधाओं के अभाव ने मिल कर बहुत से डिलीवरी ड्राइवरों को शिफ़्ट ड्यूटी करते समय खुले में 'हल्के होने' के लिये विवश किया।

जैसी कि होता आया है, टेबलायड प्रेस इन कहानियों पर टूट पड़ा है, और ड्राइवरों को शर्मिंदा कर के इस मौक़े का मज़ा ले रहा है। जबकि ड्राइवरों का तर्क है कि असल दोषी अमेज़न जैसी कंपनियाँ हैं, जो अपने कर्मचारियों को उनके आधारभूत अधिकारों से वंचित कर रही हैं।

सबसे ताज़ा हमला मानचेस्टर में एक अमेज़न कूरियर को खुले में शौच करने के लिये शर्मसार करने वाले 'मेट्रो न्यूज़' के रूप में हुआ है। इस आर्टिकल में ग्राहक ने, जिसने इस घटना की शिकायत अमेज़न से की और प्रेस को ख़बर की थी कहा, 'मुझे तो इस पर विश्वास ही नहीं हो रहा था, विशेषकर तब जब हम सब पैंडेमिक का सामना कर रहें हैं .......इनमे से किसी का भी कोई औचित्य नहीं हो सकता।"

मगर अमेज़न के डिलीवरी ड्राइवरों ने, जिन्होंने नोवारा मीडिया से बात की, कहा कि इस घटना का वस्तुतः बहुत कुछ औचित्य है, ख़ासकर उन अक्षम्य कार्यदशाओं को देखते हुए, जिनके लिये उन्हें मजबूर किया जा रहा है -- वे कार्यदशायें जो पैंडेमिक के कारण और भी दुष्कर-भयावह हो गयी हैं।

ज़ाहिर है, मेट्रो आर्टिकल ने, ऐसी ख़बरों की ज़्यादातर रिपोर्टिंग की ही तरह, इस मामले में भी किसी भी डिलीवरी ड्राइवर की टिप्पणी को शामिल नहीं किया गया। फ़्रान स्कॉयफ़े, एक डिलीवरी ड्राइवर और इंटरनेशनल वर्कर्स ओफ़ ग्रेट ब्रिटेन (IWGB) ट्रेड यूनियन की महिला और नान-बाइनरी अधिकारी का कहना है कि इस तरह की मीडिया कहानियाँ वर्करों के लिये "शर्मिंदा करने वाली, अपमानजनक,और अमानवीयकरण करने वाली हैं। ये कर्मचारी अधिकतर इमिग्रेंट हैं - जिनके काम कम वेतन वाले और अनिश्चित होते हैं।

एरिक ने, जो सितम्बर से अमेज़न डिलीवरी ड्राइवर का काम कर रहा है, कहा "आर्टिकल देख कर मैं जैसे तबाह हो गया।" उसका कहना है कि इस तरह की मीडिया खबरें ड्राइवरों को उनकी कार्यदशाओं की वास्तविकताओं को नज़रंदाज़ करते हुए "घृणित और गन्दा" के रूप में लांक्षित करती हैं, जो पैंडेमिक के दौरान अत्यावश्यक सेवायें दे रहे हैं।

'तुम एक गुलाम हो'

अमेज़न डिलीवरी ड्राइवर आउट सोर्स की हुई कंपनियों के लिये स्वनियोजित ठेकेदारों के रूप में काम करते हैं। बस एक रात पहले उन्हें पता चलता है कि अगली सुबह उन्हें कब से काम शुरू करना है - या उन्हें काम करना भी है या नहीं। एरिक कहता है कि काम का दिन अक्सर सुबह तड़के और बेहद तनावपूर्ण भागम-भाग के साथ शुरू होता है। ड्राइवरों को डिपो से 350 पार्सल अपनी वैन में लादने के लिये बस पंद्रह मिनट का समय दिया जाता है।

काम के दिन की लंबाई इस बात से तय होती है कि एक ड्राइवर कितनी जल्दी अपने पार्सल डिलिवर कर पाता है और यदि कोई पार्सल छूट जाए तो और भी ज़्यादा देर काम करना पढ़ता है ।

कार्ल ने, जिसने पूरे पैंडेमिक में अमेज़न कूरियर का काम किया है, बताया, 'कई बार मुझे सुबह 5.30 पर (डिपो) पहुँच जाना पड़ता है और मैं शाम 5 या 6 बजे तक काम पूरा कर पाता हूँ।" अमेज़न ड्राइवरों के रूट तय करने और उनकी गतिविधियों पर नज़र रखने के लिये एक ऐप का इस्तेमाल करता है। इस एप पर ऐमज़ान उनके काम के घंटों को सीमित कर 10 घंटे से अधिक नही होने देता। कार्ल आगे बताता है कि, जब भी ऐसा होता है, उसका मैनेजर उसको फ़ोन कर के ऐप से लॉग आउट होने और किसी अन्य एकाउंट से लॉग इन कर के डिलिवरी जारी रखने का निर्देश देता है।

आमतौर पर, शिफ़्ट के दौरान ड्राइवरों को कोई विश्राम अवकाश नहीं मिलता, और न ही उनके लिये टॉयलेट सुविधा की कोई गारंटी है। कामगारों के अनुसार जब नियोजक नये ड्राइवर ले रहे होते हैं, वे टॉयलेट ब्रेक का कोई उल्लेख नहीं करते।

कार्ल बताता है कि पैंडेमिक से पहले भी टॉयलेट सुविधा का उपयोग कर पाना बहुत मुश्किल और जटिल था। ड्राइवरों को स्थानीय सार्वजनिक शौचालयों, या फिर दुकान या कैफ़े के टॉयलेटों का इस्तेमाल करना पड़ता है जिसके लिये, निहायत कम वेतन के बावजूद अक्सर अनावश्यक रूप से पैसे खर्च करने पड़ते हैं। इसके अलावा, ड्राइवरों को जिस निगरानी, कार्यभार, और टार्गेट का सामना करना पड़ता है, उसमें आमतौर पर किसी टॉयलेट को खोजने और इस्तेमाल करने का समय निकाल पाना असंभव हो जाता है।

कार्ल ने आगे बताया कि एक बार उसने टॉयलेट ब्रेक लेने के लिये सबसे नज़दीक की सुविधा की ओर, जो एक सुपरमार्केट था, वैन का रूट बदल दिया।इस पूरे रूट डायवर्जन में कुल पंद्रह मिनट लगे, तब तक मैनेजर का फ़ोन आ गया कि उसने काम क्यों बंद कर दिया है। कार्ल ऐप के ज़रिये लगातार अपनी गतिविधियों, व्यवहार, और तौर-तरीक़ों पर नज़र रखे जाने के अनुभव के बारे में बताता है कि उसे लगता है जैसे उसे " बाँध दिया गया हो ....जैसे आप एक गुलाम हो, जैसे आप के कोई अधिकार ही नहीं हों।"

'क्या अब हम मानवप्राणी नहीं रहे ?'

ड्राइवर बताते हैं कि पैंडेमिक के दौरान काम पर टॉयलेट सुविधा का नहीं मिलना कहीं ज़्यादा तकलीफ़देह हो गया क्योंकि अधिकांश सार्वजनिक और दुकानों के टॉयलेट बंद हो गये थे। कार्ल कहता है कि उन स्थितियों में भी, जहां पेट्रोल स्टेशनों या सुपरमार्केट के टॉयलेट खुले हुए थे, सोशल डिस्टैंसिंग नियमों के कारण लगी लाइनें अक्सर इतनी लंबी होती थीं कि ड्राइवरों के लिये समय निकाल पाना संभव नहीं हो पाता था : अमेज़न तुरंत ख़बर लेने लगता था कि तुम्हें रास्ता छोड़ने की इजाज़त नहीं है।

कार्ल का दावा है की इन परिस्थितियों में लगभग सारे ड्राइवर "बोतल में मूत्र त्याग" का रास्ता अपनाते थे क्योंकि कोई दूसरा उपाय था ही नहीं।कार्ल उन घटनाओं को भी याद करता है जिनमे ड्राइवर "अपनी वैन के पीछे प्लास्टिक के थैले में पेशाब किया करते थे" क्योंकि उनके लिये और कोई दूसरा विकल्प था ही नहीं। वह पूछता है " क्या हम अब मानव प्राणी नहीं रहे ?"

एरिक कहता है कि उसने भी पैंडेमिक के दौर में पेशाब करने के लिये काम पर बोतल का इस्तेमाल किया है। "यह बहुत शर्मिंदा करने वाली बात है, मगर यही है जो हो सकता था"। वह अब काम के दौरान पानी पीने से परहेज़ करता है जिससे इस तरह की असुविधाजनक स्थितियों से यथासंभव बचा जा सके। स्कायफ़े के अनुसार इस तरह का व्यवहार कोई असामान्य या अपवाद नहीं है। वे एक IWGB सदस्य का मामला याद करते हैं, जो सायकिल कूरियर था और पिछले साल के सबसे गर्म मौसम में भी एक दिन में पचास किलोमीटर तक सायकिल बिना कोई तरल द्रव्य पीये चलाता रहता था, जिससे सार्वजनिक स्थान पर मूत्रत्याग न करना पड़े। वे ज़ोर देते हैं कि कर्मचारी "अपने स्वास्थ्य को ख़तरे में डाल रहे हैं।"

महिलाओं, नान-बाइनरी और ट्रांस डिलिवरी ड्राइवरों के लिये यह स्थिति और भी बुरी है। ऐसा सिर्फ़ इसलिये नहीं है कि उनके लिये सार्वजनिक स्थानों पर छिप कर मूत्रत्याग कर पाना कहीं ज़्यादा मुश्किल है, बल्कि इसलिये भी कि ऐसा करने में उन पर शारीरिक हमले का कहीं ज़्यादा ख़तरा है। उनमें से कइयों को काम के दौरान माहवारी को भी संभालना होता है। स्कायफ़े सदस्यों की उन स्थितियों की याद करते है जब उन्हें "कूड़ेदानों के पीछे टैंपून बदलना पड़ता था" ; और कुछ अपने पीरियड में काम की असुविधाओं के चलते पूरे-पूरे हफ़्ते काम से अलग रहने को मजबूर हो जाती थीं।

'वे सोचते हैं हम मशीन हैं'

स्कायफ़े बताते है कि अमेज़न और दूसरी कंपनियाँ डिलिवरी ड्राइवरों की कार्यदशाओं से संबंधित ज़िम्मेदारियों से काम उन कंपनियों को आउट सोर्स कर के 'छुटकारा' पा लेती हैं जो कर्मचारियों को ' स्वनियोजित' आधार पर रखती हैं।

इस बारे में अमेज़न से उसका पक्ष जानने के लिये सम्पर्क करने पर अमेज़न ने इस आउटसोर्सिंग पर पूरा बल देते हुए कहा : " हम इस बात के लिये प्रतिबद्ध हैं कि हमारे डिलिवरी प्रदाताओं ( providers) द्वारा ठेके पर लिये गये लोगों को जायज़ मुआवज़ामिले और उनके साथ सम्मान पूर्वक पेश आया जाय...।" हालाँकि विश्राम अवकाश और टॉयलेट पर विशेष रूप से पूछे जाने पर, अमेज़न के कमेंट में इन मुद्दों को संबोधित नहीं किया।

कार्ल कहता है, "(अमेज़न) कोई परवाह नहीं करता, वे सोचते हैं हम मशीनें हैं .... वे हमारा इस्तेमाल कर रहे हैं, और यह सही है कि वे पार्सलों को हवा से भेजने के लिये ड्रोनों का इस्तेमाल करने जा रहे हैं।"

कार्ल बताता है कि कॉरपोरेशन ने “बहुत सारे लोगों द्वारा अमेज़न के अपने कर्मचारियों के साथ किये जाने वाले बर्ताव की शिकायत" के चलते अब अपने ड्राइवरों के ऐप पर अलर्ट भेज कर उन्हें ब्रेक लेने के लिये आगाह करना शुरू किया है। मगर कार्ल के अनुसार यह बस एक खोखला दिखावा है, ख़ासकर यह देखते हुए कि उनके लिये ब्रेक के लिये समय निकाल पाना असंभव है।" अगर आप दस या पंद्रह मिनट से ज़्यादा का ब्रेक लेते हैं, तुरंत आप के पास फ़ोन आ सकता है, या फिर आप अपनी डेलिवरी टारगेट में पीछे रह जाते हैं।" स्पष्ट है कि ऐप को अद्यतन (update) करने का एकमात्र मतलब यह है कि अमेज़न "खुद को किसी परेशानी में नहीं डालना चाहता।"

एरिक भी सहमत है कि हाल ही में किये गये ब्रेक नोटिफ़िकेशन अपडेट का कोई मतलब नहीं है। वह कहता है : "ग्रुप चैट में एक चुटकुला खूब चल रहा है कि ऐप तुम्हें रुकने और खाने के लिये कह रहा है।"

कुल मिला कर कार्ल कार्यदशाओं में किसी सुधार की संभावनाओं को ले कर बिल्कुल भी आशान्वित नहीं है क्योंकि "अमेज़न इतना ज़्यादा ताकतवर है।"

सभी कर्मचारी, जिन्होंने नोवारा मीडिया से बात-चीत की, सहमत थे कि यदि अमेज़न उन कंपनियों को उनके जॉब आउट सोर्स नहीं करती जो उन्हें स्व-नियोजित आधार पर रखती हैं, तब वे बेहतर कार्यदशाओं की माँग कर पाने की कहीं ज़्यादा मज़बूत स्थिति में होते।

एरिक कहता है :" मैं जिस कंपनी के लिये काम करता हूँ वह अमेज़न नहीं है, मगर आज तक मैंने अमेज़न पार्सल छोड़ कर कुछ और कभी डिलिवर नहीं किया है।" " मुझे त्योहार का कोई वेतन नहीं मिलता, मुझे बीमारी का कोई वेतन नहीं मिलता, मुझे वैन किराये पर लेनी होती है।"

लगातार बढ़ते जाते असहनीय शोषण के चलते अब काफ़ी संख्या में ड्राइवर यूनियनों में शामिल हो रहे हैं। पिछले साल के अंत में प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल के ब्लैक फ़्राइडे बॉयकाट और अमेज़न के ख़िलाफ़ हड़ताल के बाद, IWGB की कूरियर और लॉजिस्टिक शाखा ने अपनी क़तारों में अमेज़न फ़्लेक्स डिलिवरी वर्कर्स का स्वागत करने के पक्ष में वोट किया।

ऐलेक्स मार्शल, IWGB अध्यक्ष और भूतपूर्व कूरियर ने कहा : " हम कारपोरेट दैत्यों को चुनौती देने से नहीं घबराते", "और हम अमेज़न फ़्लेक्स कर्मचारियों को यही करने के लिये सशक्त करेंगे।"

स्कायफ़े सहमत है "किसी ऑफ़िस में क्या आप इस स्थिति में रखे जा सकते हैं जहां आप टॉयलेट सुविधाओं का इस्तेमाल नहीं कर सकें ? हमें कर्मचारियों जैसे ही समान अधिकार दिये जाने की ज़रूरत है।"

सोफ़ी के. रोज़ा एक स्वतंत्र पत्रकार है।

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Available in
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Author
Sophie K Rosa
Translators
Vinod Kumar Singh and Laavanya Tamang
Date
01.03.2021

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