वेनेज़ुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगस ने वेनेज़ुएला के प्राणी उद्यानों, जैवउद्यानों और वन्यजीव संरक्षण केंद्रों के नेटवर्क को आधुनिक और सुदृढ़ बनाने के लिए इकोसोशलिज़्म मंत्रालय और भारत के ग्रीन्ज़ ज़ूलॉजीकल रेस्क्यू एंड रीहैब्लिटेशन सेंटर (जीज़ेडआरआरसी) के साथ सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने की अध्यक्षता की।
जीज़ेडआरआरसी भारत के गुजरात राज्य में वैश्विक संरक्षण पहल वंतारा की कार्यकारी इकाई है।
वेनेज़ुएला की नेता के अनुसार, ग्रीन्ज़ “वेनेज़ुएला की जैव-विविधता के प्रबंधन और संरक्षण मानकों को ऊँचा उठाने के लिए तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण और तकनीक उपलब्ध कराएगी।”
उन्होंने शनिवार 5 सितंबर को टीवी पर प्रसारित आयोजन के दौरान कहा, “हमारे पेशेवर भारत के पाठ्यक्रमों में भाग ले सकेंगे।”
रोड्रिगस ने कहा कि वेनेज़ुएला में 16 प्राणी उद्यान और एक्वेरियम, 12 प्रजनन केंद्र और चार बचाव केंद्र हैं। उन्होंने यह घोषणा भी की कि 24 जून के दोहरे भूकंप के बाद “ला ग्वेरा राज्य के उबरने की महायोजना में एक एक्वेरियम, एक वन्यजीव संरक्षण केंद्र, एक पशु चिकित्सा केंद्र और एक वन्यजीव अस्पताल को शामिल किया जाना” इस समझौते का हिस्सा है।
वंतारा के साथ इस पाँच-वर्षीय समयसीमा की पहल में पशुचिकित्सकों, जीवविज्ञानियों और वन्यजीव प्रबंधन और संरक्षण से जुड़े अन्य पेशेवरों के लिए विनिमय कार्यक्रम भी शामिल हैं।
इससे कुछ दिन पहले ही वेनेज़ुएला ने इंटरनैशनल बिग कैट गठबंधन (आईबीसीए) की स्थापना के लिए फ़्रेमवर्क समझौते को स्वीकृति देने वाला कानून बनाया था। यह गठबंधन बिल्ली वंश की उन सात प्रजातियों को बचाने पर ध्यान केंद्रित करेगा जो धरती में सर्वाधिक प्रतिनिधि मानी जाती हैं। वेनेज़ुएला संसार की सात सबसे महत्वपूर्ण बिल्ली प्रजातियों का निवास है और ये विश्व की बिल्लियों की जैव-विविधता का 14 प्रतिशत हिस्सा है।
यह कानून भारत द्वारा 2023 में रखे गए प्रस्ताव से उपजा है, जिसे अभी तक 13 सदस्य देशों का समर्थन प्राप्त हो चुका है और 25 से अधिक अन्य देशों ने इसकी सदस्यता के लिए आवेदन किया है।
हाल ही के समारोह के दौरान रोड्रिगस ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राजदूत पी.के. अशोक बाबू, वंतारा और धनाढ्य अंबानी परिवार का “उनके समस्त समर्थन” के लिए धन्यवाद दिया।
वेनेज़ुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति ने प्रमुख भारतीय कंपनियों के लिए निवेश और व्यापार अवसरों की पेशकश करने के लिए जून में भारत की चार-दिवसीय यात्रा की। इन कंपनियों में टाटा समूह, अमूल और रिलायंस शामिल है। इनमें रिलायंस हाल-फिलहाल के महीनों में वेनेज़ुएला के कच्चे तेल का प्रमुख आयातक है।
वंतारा को अंबानी परिवार के प्रमुख कंपनी समूह रिलायंस इंडस्ट्रीज़ का समर्थन प्राप्त है। इसकी ऊर्जा, दूरसंचार, वित्तीय सेवाएँ, रीटेल समेत अनेक आर्थिक क्षेत्रों में प्रमुख उपस्थिति है। इसका वन्यजीव बचाव केंद्र गुजरात में जामनगर तेलशोधक संयंत्र के दायरे में स्थित है जो दुनिया में सबसे बड़ा है। लगभग 3500 एकड़ क्षेत्रफल वाले इस केंद्र का प्रबंधन भारत के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी के छोटे बेटे अनंत अंबानी करते हैं।
वंतारा के घोषित वन्यजीव संरक्षण मिशन और परोपकारी प्रयत्नों के बावजूद यह कंपनी हाल के वर्षों में विवाद का सामना करती आई है।
विभिन्न पर्यावरण समूहों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों का आरोप है कि यह “एक विशालकाय निजी प्राणी उद्यान” के रूप में कार्य करता है, दुनियाभर में वन्यजीवों का प्रबंधन कमोडिटी के रूप में करता है और उन अंतरराष्ट्रीय विनियमों में खामियों का फायदा उठाता है जो यह सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं कि वन्य जीवों और पौधों का व्यापार उनके जीवित रहने के लिए खतरा न बने।
वंतारा द्वारा वन्यजीवों, खासकर हाथियों के कथित रूप से अवैध अधिग्रहण के साथ ही वन्यजीव विनियमों के संभावित उल्लंघन और धन शोधन के आरोपों की जाँच करने के लिए भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 2024 में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के एक पैनल की नियुक्ति की थी। न्यायालय ने करानार्थम विरामह फ़ाउंडेशन द्वारा दायर शिकायत को अंततः खारिज कर दिया।
लेकिन, व्यापार के उद्देश्य से अनोखे जानवरों का प्रजनन कराने के लिए वंतारा की आलोचना और साथ ही एक तेलशोधक कारखाने के इर्दगिर्द एक वन्यजीव अभयारण्य स्थापित करने को लेकर पर्यावरणीय चिंताएँ कायम हैं।
इस भारतीय समूह के साथ वेनेज़ुएला का आदान-प्रदान नवीनतम सहमति ज्ञापन से पहले से चला आ रहा था। जर्मनी के दैनिक समाचारपत्र ज़्यूडायचे त्साइटुंग और वेनेज़ुएला के समाचार पोर्टल अरमान्डो.इंफ़ो की एक साझा जाँच में यह दावा किया गया है 2024 के अंत तक दुनियाभर के कम से कम 39,000 वन्यजीवों को वंतारा के परिसर में स्थानांतरित किया गया।
इनमें 5000 से अधिक ज्ञात जानवर वेनेज़ुएला से स्थानांतरित किए गए हैं। इनमें ओरिनोको मगरमच्छ, हार्पी गरुड़, लोलैंड टैपिर, विशाल चींटीखोर, जगुआर और मकड़ी वानर जैसी संरक्षित प्रजातियों के जानवर शामिल हैं।
