Environment

कोहनियाँ ऊपर? कनाडा अपने खदानों में अमरीकी रक्षा मंत्रालय को 'अनोखा' हिस्सा लेने दे रहा है।

कनाडा ज़रूरी खनिजों की खुदाई को तेज़ी से आगे बढ़ा रहा है, जबकि अमरीका का रक्षा मंत्रालय गुपचुप तरीके से पैसा लगाकर और इसमें हिस्सेदारी खरीदकर इन खनिजों का रुख अमरीकी हथियारों के निर्माण की तरफ मोड़ रहा है।
मौसम के बदलाव को रोकने के ज़रूरी उपाय के रूप में दिखाए जा रहे इन खुदाई के कामों को बहुत जल्दी मंज़ूरी दी जा रही है और इनके अंतिम अनुरेखण की जाँच भी कमज़ोर है, जिससे इनका वास्तविक गंतव्य भी अस्षट रहता है। असल में ये खनिज लड़ाकू विमानों, मिसाइलों और सुरक्षा कवचों के लिए जा रहे हैं। ये खदानें ज़्यादातर वहाँ के मूल निवासियों की ज़मीनों पर हैं। अमरीकी रक्षा मंत्रालय द्वारा कनाडाई खदान कंपनियों में सात करोड़ अस्सी लाख डॉलर से अधिक का निवेश करने और मालिकाना हक हासिल करने के बावजूद, कनाडा की सरकार अमरीका पर बाहरी निवेश से जुड़ी पाबंदियाँ लगाने में नाकाम रही है। इससे कनाडा के केवल अमरीका के लिए खुदाई का इलाका बनकर रह जाने का खतरा पैदा हो गया है।

भले ही प्रधानमंत्री मार्क कार्नी कनाडा की आर्थिक आज़ादी की रक्षा करने की अपनी योजनाओं का प्रचार कर रहें हों, फिर भी देश के ज़रूरी खनिज अमरीकी हथियारों में जा रहे हैं।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अमरीका कनाडा की खदानों पर मालिकाना हक हासिल करने के लिए संभवतः अनोखे कदम उठा रहा है। इससे कनाडा और वहाँ के वे मूल निवासी जिनकी ज़मीनों से ये खनिज निकाले जा रहे हैं, अमरीका के लिए खुदाई का इलाका बनते जा रहे हैं। इस सब के बीच, कनाडा की सरकार इन परियोजनाओं को पैसा देने और इन्हें तेज़ी से आगे बढ़ाने में मदद कर रही है।

राज्यों से लेकर केंद्र के स्तर तक, कनाडा अपने सुदूर उत्तर से ज़रूरी खनिजों को निकालने के काम को तेज़ी से बढ़ाने में जुटा हुआ है। इन खनिजों को बेहद ज़रूरी बताया गया था, पहले साफ़ सुथरी ऊर्जा की तरफ़ बढ़ने के लिए, और फिर अमरीका द्वारा कब्ज़ा किए जाने के खतरों के बीच, कनाडा की खुद की सुरक्षा के लिए।

निकल, ताँबा, ग्रेफाइट, कोबाल्ट, टंगस्टन, क्रोमियम और दुर्लभ खनिज सिर्फ बैटरियों और हवा से बिजली बनाने वाले पंखों के लिए ही ज़रूरी चीज़ें नहीं हैं। इनकी ज़रूरत लड़ाकू विमानों, बिना चालक वाले विमानों यानी ड्रोन, मिसाइलों, रडार प्रणालियों, पनडुब्बियों, सुरक्षा कवचों और गोला बारूद बनाने के लिए भी होती है।

कनाडाई खनिज लंबे समय से अमरीका के युद्धों के लिए एक भरोसेमंद ज़रिया रहे हैं। कनाडा की धरती से ही अमरीका के परमाणु बमों के लिए यूरेनियम, उसके लड़ाकू जहाज़ों के सुरक्षा कवचों के लिए निकल और उसके लड़ाकू विमानों के लिए एल्युमिनियम गया था।

लेकिन जब कनाडा के खनिजों को किसी दूसरे देश के सैन्य निर्माण के लिए सुरक्षित रखा जा रहा है, तो क्या यह सचमुच कनाडा के खुद के देश के हित में है?

बैटरियां या बम?

इन खनिजों को सुरक्षित करने के लिए इतिहास में अमरीका ने कनाडा की खनन कंपनियों को सरकारी अनुदान और वित्तीय मदद दी है। लेकिन चीन के साथ अमरीका के बढ़ते शीत युद्ध के कारण अमरीकी रक्षा मंत्रालय अपना निवेश बढ़ा रहा है। 2022 से शुरू करते हुए अमरीकी रक्षा मंत्रालय ने ज़रूरी खनिज निकालने वाली कनाडा की खनन कंपनियों में लाखों डॉलर निवेश शुरू कर दिया।

उस समय कनाडा में इस खबर पर शायद ही किसी ने ध्यान दिया। इसके बजाय अखबारों ने  केंद्र और राज्य सरकारों के उन वादों की सुर्खियां छापीं कि यही खनिज बिजली से चलने वाले वाहनों और बैटरी कारखानों से जुड़ी साफ़ सुथरी तकनीक की क्रांति को बढ़ावा देंगे।

8वीं फायर राइजिंग नामक शोध समूह के एक हिस्से के रूप में, हमने ज़रूरी खनिज क्षेत्र से जुड़ी नई आपूर्ति कड़ियों की जांच की। हमने पाया कि कनाडा में ज़रूरी खनिजों की इस होड़ के पीछे का नवीनतम पैसा असल में अमरीकी रक्षा मंत्रालय से आ रहा है, जो इस धरती पर ग्रीनहाउस गैसों का सबसे बड़ा उत्सर्जन करने वाली अमरीकी सेना की देखरेख करता है।

वर्ष 2024 और 2025 के केवल दो वर्षों में अमरीकी रक्षा मंत्रालय ने कनाडा में खनन परियोजनाओं को चलाने वाली कंपनियों में सात करोड़ अस्सी लाख अमरीकी डॉलर से अधिक का निवेश किया। इनमें फार्च्यून मिनरल्स, लोमिको मेटल्स, फायरवीड मेटल्स, नार्थक्लिफ रिसोर्सेज, नैनो वन मैटेरियल्स और इलेक्ट्रा बैटरी मैटेरियल्स शामिल हैं।

सहयोग के रूप में दिखाई गई इस व्यवस्था ने, यहाँ तक कि दोनों देशों के बीच तनाव के समय में भी, कनाडा की खनन प्राथमिकताओं को अमरीकी सैन्य ज़रूरतों के हिसाब से बदल दिया है।

फिर वर्ष 2025 में रक्षा मंत्रालय ने वैंकूवर की खनन कंपनी ट्रिलॉजी मेटल्स में दस प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के लिए तीन करोड़ छप्पन लाख अमरीकी डॉलर खर्च किए, जो अलास्का से ताँबा, कोबाल्ट, सोना और चाँदी निकालने की योजना बना रही है। इसके साथ भविष्य में मालिकाना हक बढ़ाने के विकल्प और निदेशक मंडल के एक सदस्य को नियुक्त करने का अधिकार भी मिला। अमरीका के ऊर्जा मंत्रालय ने भी लिथियम अमेरिकाज़ में पांच प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी, जो वैंकूवर की ही एक अन्य कंपनी है और दुनिया की सबसे बड़ी लिथियम खदानों में से एक को विकसित कर रही है।

अंतरराष्ट्रीय वकील लॉरेंस हरमन के अनुसार अमरीकी सरकार का कनाडा की खनन कंपनियों में हिस्सेदार होना एक संभवतः अनोखी व्यवस्था है।

ये नियंत्रण करने वाले शेयर नहीं हैं, लेकिन व्यापार नियमों के विशेषज्ञ वकील सैंडी वॉकर ने चेतावनी दी है कि एक बार जब ये खदानें काम करना शुरू कर देंगी, तो अमरीकी सरकार इस बात पर अड़ सकती है कि ये खनिज केवल अमरीका के पास ही जाएं।

कनाडा के पास ऐसी नीतियां हैं जो उसे विदेशी सरकारों के घरेलू निवेश को रोकने की अनुमति देती हैं, खासकर यदि वे निवेश जो कनाडा की अपनी सुरक्षा के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं। वर्ष 2022 में कनाडा की सरकार ने तीन चीनी कंपनियों को कनाडा की ज़रूरी खनिज कंपनियों से अपना निवेश हटाने का आदेश दिया था। अमरीका द्वारा ट्रिलॉजी मेटल्स या लिथियम अमेरिकाज़ में किए गए सरकारी निवेश पर ऐसा कोई कड़ा आदेश नहीं दिया गया है।

जलवायु प्रलोभन और धोखे की रणनीति

अमरीकी रक्षा मंत्रालय ने जिन खनन परियोजनाओं में निवेश किया है, उनमें से लगभग सभी को जलवायु बदलाव को रोकने के उपायों के रूप में दिखाया जा रहा है। क्यूबेक में लोमिको मेटल्स कंपनी अपनी प्रस्तावित ला लूत्रे ग्रेफाइट खदान को एक स्थानीय और नवीकरणीय ऊर्जा व्यवस्था के हिस्से के रूप में पेश करती है। इसे अमरीकी रक्षा मंत्रालय से चौरासी लाख अमरीकी डॉलर का अनुदान मिला है, और उतनी ही मदद के तौर पर कनाडा के प्राकृतिक संसाधन विभाग से उनचास लाख कनाडाई डॉलर का अनुदान भी मिला है।

लेकिन इस खुली खदान से ग्रेफाइट निकलता है, जो सैन्य उद्योग में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाली सामग्री है। यह देखते हुए कि अमरीका ने 1950 के दशक से अपने यहाँ ग्रेफाइट का उत्पादन नहीं किया है और वह इसके लिए पूरी तरह से चीनी आपूर्ति पर निर्भर है, इसलिए अमरीकी रक्षा मंत्रालय का यह निवेश बहुत सोच समझकर की गई रणनीति है।

इन परियोजनाओं के ज़रिए खोजे जा रहे ग्रेफाइट सहित कई खनिज दोहरे उपयोग वाले हैं, जिसका मतलब है कि वे आम जनता और सेना दोनों के काम आ सकते हैं। लेकिन कनाडा की पर्यावरण जांच प्रक्रियाएं यह नहीं पूछती हैं कि खदान से निकलने के बाद ये खनिज आख़िरकार कहाँ जाएंगे। वे यह नहीं पूछती हैं कि निकाली गई सामग्री से बैटरियां बनेंगी या हथियार बनेंगें।

यह बात बहुत मायने रखती है क्योंकि ज़रूरी खनिजों की आपूर्ति की कड़ियां पूरी तरह से छिपी हुई हैं। खनिजों को कई देशों और क्षेत्रों में मिलाया, बेचा, साफ़ और बदला जाता है, जिससे उनके अंतिम उपयोग कहाँ हुआ इसका पता लगाना बेहद मुश्किल हो जाता है।

यह तब एक बड़ी समस्या बन जाती है जब इन खनिजों को निकालने की शुरुआत इस तर्क के साथ सही ठहराई जाती है कि कनाडा को जलवायु बदलाव से लड़ने के लिए अपने देश के भीतर उपाय तैयार करने की ज़रूरत है।

इस तर्क के तहत, पर्यावरण की जांच और वहाँ के मूल निवासियों से परामर्श लेने को जलवायु बदलाव पर तुरंत कदम उठाने के रास्ते में गैर ज़रूरी रुकावट माना जा रहा है। कार्नी का चुनावी वादा कि हर हाल में निर्माण करो, अब राज्यों और केंद्र के उन कानूनों के रूप में सामने आ रहा है जो देश के हित में मानी जाने वाली परियोजनाओं के रास्ते से कागज़ी और कानूनी रुकावटों को हटाते हैं।

कनाडा की राजधानी औटावा की सरकार ने केवल मुकदर्शक बनकर ही अमरीका को अपने ज़रूरी खनिजों पर नियंत्रण करते नहीं देखा है, बल्कि वह इसके लिए पैसा देने में भी मदद कर रही है। जैसा कि एक सुरक्षा शोध परियोजना से पता चलता है, अमरीकी रक्षा मंत्रालय के हाल के लगभग हर निवेश के साथ कनाडा का सरकारी पैसा भी लगाया गया था। जहाँ अमरीकी रक्षा मंत्रालय ने ऊपर बताई गई कनाडा की छह ज़रूरी खनिज परियोजनाओं को सात करोड़ अस्सी लाख अमरीकी डॉलर दिए, वहीं कनाडा सरकार ने भी उन परियोजनाओं में छह करोड़ नब्बे लाख कनाडाई डॉलर लगाए, एक तरह से कनाडा हमारे प्राकृतिक संसाधन क्षेत्र में अमरीकी सरकार के प्रभाव को खुद पैसा देकर बढ़ावा दे रहा है।

यह बदलाव न केवल कनाडा की आज़ादी, जलवायु और पर्यावरण के लिए एक खतरा है, बल्कि वहाँ के मूल निवासियों के अधिकारों के लिए भी संकट है। यदि मूल निवासियों के इलाकों से खनिज निकालकर हथियार बनाए जा रहे हैं, तो क्या वहाँ के स्थानीय मूल निवासियों को यह जानने का हक है? क्या उन्हें इसके लिए मना करने का अधिकार है? प्रभावित मूल निवासियों से कहा जा रहा है कि वे जलवायु के नाम पर अपनी मातृभूमि को होने वाले नुकसान को स्वीकार करें, जबकि इसका असली मकसद अमरीकी सेना का विस्तार हो सकता है।

मूल निवासियों का यह विरोध पूरे कनाडा में महसूस किया गया है। ला लूत्रे ग्रेफाइट खदान को कितिगन ज़िबी अनिशिनाबेग मूल निवासियों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा है, जिसके कारण क्यूबेक सरकार ने सामाजिक सहमति की कमी का हवाला देकर इस परियोजना को पैसा देने से मना कर दिया। अलास्का में ट्रिलॉजी मेटल्स द्वारा प्रस्तावित खदान की सड़कें, जो ताँबा और कोबाल्ट के भंडारों तक पहुँचने का एक जरिया हैं, उन्हें अलास्का के चालीस मूल निवासी कबीलों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा है।

न्यू ब्रंसविक में प्रस्तावित सिसन टंगस्टन परियोजना, जिसका मालिकाना हक नॉर्थक्लिफ रिसोर्सेज के पास है, उसे अमरीकी रक्षा मंत्रालय से एक करोड़ पचास लाख अमरीकी डॉलर का निवेश मिला। टंगस्टन कार्बाइड एक बेहद मज़बूत धातु है, जिसका उपयोग सुरक्षा कवच को तोड़ने वाले गोला बारूद में किया जाता है। वोलास्टोकेई कबीले के नेता सालों से इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं। कबीले की एक बुजुर्ग अल्मा ब्रूक्स ने कहा है कि वह ऐसी किसी भी चीज़ के बिल्कुल और पूरी तरह से खिलाफ हैं जो युद्ध के प्रयासों में अमरीका या कनाडा की सेना की मदद करती हो।

अमरीकी रक्षा मंत्रालय की निवेश की इस नई रणनीति को लेकर जनता के बीच खुलकर बात होनी चाहिए। कनाडा सिर्फ एक पर्यावरण के अनुकूल अर्थव्यवस्था नहीं बना रहा है, बल्कि वह अमरीकी युद्ध उद्योग में और भी गहराई से शामिल होता जा रहा है।

Available in
EnglishSpanishPortuguese (Brazil)GermanFrenchItalian (Standard)TurkishRussianArabicHindi
Authors
Shiri Pasternak and Nessie Nankivell
Translators
Kabir Ahlawat and ProZ Pro Bono
Date
25.06.2026
Source
Breach MediaOriginal article🔗
पर्यावरणयुद्ध और शांति
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